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तंत्र ही साधना श्री श्री आनंदमूर्ति
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Description
तंत्र साधना आत्मिक उन्नति और परम चेतना की अनुभूति का एक वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक मार्ग है। यह साधना मनुष्य के शरीर, मन और आत्मा के संतुलित विकास पर बल देती है तथा जीवन की प्रवृत्तियों को आध्यात्मिक शक्ति में परिवर्तित करने की शिक्षा देती है।
Prabhat Ranjan Sarkar के अनुसार तंत्र केवल रहस्यवाद या कर्मकाण्ड नहीं, बल्कि साहस, नैतिकता, ध्यान, भक्ति और मानव सेवा पर आधारित एक व्यावहारिक साधना पद्धति है। तंत्र साधना मन को नियंत्रित कर चेतना के विस्तार और आत्म-साक्षात्कार की दिशा में मार्गदर्शन करती है।
मुख्य विषय:
- आत्मिक जागरण और आत्म-साक्षात्कार
- ध्यान एवं मंत्र साधना
- शरीर, मन और आत्मा का संतुलन
- निर्भयता और आंतरिक शक्ति
- मानवता के प्रति प्रेम और सेवा
- चेतना का विस्तार
संक्षिप्त पुस्तक विवरण:
“तंत्र साधना” आध्यात्मिक जागरण, ध्यान और आत्म-परिवर्तन पर आधारित एक प्रेरणादायक ग्रंथ है, जो साधना के माध्यम से परम चेतना की अनुभूति का मार्ग प्रस्तुत करता है।